शरद कोकास का भेजा हुआ संदेश सोचने पर मज़बूर करता है!
आज पृथ्वी दिवस है।कुछ लोग इसे अपने-अपने तरीके से मना लेंगे और फ़िर अगले साल तक़ के लिये शायद भूल भी जायेंगे।बहुत से तो शायद, इस बारे मे सोचें भी ना।मुझे भी इसे मनाने की औपचारिकता पूरी करना है।पृथ्वी दिवस पर आयोजित एक प्रदर्शनी का फ़ीता काटकर उद्घाटन कर देना...
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Anil Pusadkar
khaarun river
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[22 Apr 2010 01:23 AM]



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