कौटिल्य का अर्थशास्त्र-हंसों में बगुले की तरह होता है ज्ञानियों में अज्ञानी (economic of kautilya-hans aur bagula)
माता शत्रुः पिता वैरी येन बालो न पाठितः।न शोभते सभामध्ये हंसमध्ये बको यथा।।हिन्दी में भावार्थ--ऐसे माता पिता अपनी संतान के बैरी है जो उससे शिक्षित नहीं करते। अशिक्षित व्यक्ति कभी भी बुद्धिमानो की सभा में सम्मान नहीं पाता। वहां उसकी स्थिति हंसों के झुण्ड...
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दीपक भारतदीप
आध्यात्म
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[21 Apr 2010 23:25 PM]



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