एक देहाती बोध कथा

एक आलसी का चिठ्ठा घने डरावने जंगल से एक धुनिया (रुई धुनने वाला) जा रहा था। मारे डर के उसकी कँपकँपी छूट रही थी कि कहीं शेर न आ जाय ! धुनिए को एक सियार दिखा । पहले कभी नहीं देखा था इसलिए शेर समझ कर भागना चाहा लेकिन भागने से अब कोई लाभ नहीं था - खतरा एकदम सामने था। सियार को... [पूरी पोस्ट]
writer गिरिजेश राव

बोध कथा

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[21 Apr 2010 22:41 PM]

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