ले ना जा पाए दुनिया से, कुछ उखाड़ के

स्वप्नलोक कितने आये, चले गए सब, हाथ झाड़ के ।ले ना जा पाए दुनिया से, कुछ उखाड़ के ॥कुछ ने दुनिया बुरी बताई, रोते रह गए ।कुछ ईश्वर की रचना को, 'अतिसुन्दर' कह गए ॥लेकिन कुछ ने देखा इसको, आँखें फाड़ के ।ले ना जा पाए दुनिया से, कुछ उखाड़ के ॥कुछ की शादी ना हो पायी, कुआँरे... [पूरी पोस्ट]
writer विवेक सिंह
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[21 Apr 2010 21:47 PM]

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