कबीर के श्लोक -१८
कबीर बेड़ा जरजरा, फूटे छेंक हजार॥
हरूऐ हरूऐ तिरि गए, डूबे जिन सिर भार॥३५॥ कबीर जी कह्ते है कि यह जो बेड़ा अर्थात समुद्री जहाज है यह बहुत ही नाजुक हालत मे हैं और इस मे हजारों छेद हो चुके हैं। लेकिन हजारो छेद होने के बावजूद भी जो हल्के हल्के थे। वे तो तैरते...
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परमजीत बाली
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[21 Apr 2010 21:07 PM]



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