प्रीति की रीति

ऋषभ उवाच तुलसी का साहित्य जीवन और जगत के तमाम अनुभवों के सार से लबालब भरा है। भक्ति और अध्यात्म का नीति और व्यावहारिकता के साथ समन्वय तुलसी की एक बड़ी विषेषता है जो उन्हें जनता का हृदयहार बनाए हुए है। उन्होंने लोकरंजन और लोकरक्षण का अपना कविधर्म निभाते हुए अनेक... [पूरी पोस्ट]
writer ऋषभ Rishabha

'रामायण संदर्शन' के संपादकीय

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[21 Apr 2010 16:29 PM]

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