क्षणिकाएँ... संजीव 'सलिल'
क्षणिकाएँ...संजीव 'सलिल' *कर पाता दिल अगर वंदना तो न टूटता यह तय है. *निंदा करना बहुत सरल है.समाधान ही मुश्किल है.*असंतोष-कुंठाकब उपजे?बूझे कारण कौन?'सलिल' सियासतस्वार्थ साधती जनगण रहता मौन.*मैं हूँ अदना शब्द-सिपाही.अर्थ सहित देंशब्द गवाही..*Acharya...
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आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
samyik hindi kavita
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[21 Apr 2010 14:08 PM]



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