भोजपुरी दोहे: संजीव 'सलिल'
भोजपुरी दोहे:संजीव 'सलिल' रूप धधा के मोर जस, नचली सहरी नार.गोड़ देख ली छा गइल, घिरना- भागा यार..*बाग़-बगीचा जाई के, खाइल पाकल आम.साझे के सेनुरिहवा, मीठ लगल बिन दाम..*अजबे चम्मक आँखि में, जे पानी हिलकोर.कंव राजकुमार के, कथा कहsसु जे लोर..*कहतानी नीमन...
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आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
samyik hindi kavita
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[21 Apr 2010 13:40 PM]



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