जवानी !
लाशों का बवंडर भी जिन्हें रुला नहीं पाती, धधकते सीने की आग समंदर भी बुझा नहीं पाती. जब बदलाव के लिए ये नौजवान खड़े होते हैं , इनके पैरों को ये सियासत भी हिला नहीं पाती. अदभुत अदम्य शाहस बलिदान जिसकी थाती, अकल्पनीय सोच, मर जाने की परिपाटी .बदल देता है राज...
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aarya
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[21 Apr 2010 13:22 PM]



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