मेरा जूता !

दिल से मेरे पैर का अंगूठा  अक्सर मेरे फटे हुए जूते में से मुह निकाल कर झांकता है और कहता है... कम से कम अब तो रहम करो इस जूते पर और मुझ पर जब भी कोई पत्थर देखता हूँ तो सहम उठता हूँ , इतने भी बेरहम मत... [पूरी पोस्ट]
writer nilesh mathur
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[21 Apr 2010 12:34 PM]

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