है हर ज़िन्दगी का बस यही तो तराना

जीवन के अनमोल रंग हर पल में चलना और बस चलते रहना, गिरना, संभालना और उठ खड़े होना,लड़ना, नष्ट होना और लुप्त होकर फिर जन्म लेना,थकना, थक के चूर होना और फिर शुरू हो जाना, रो रो के हसना और हस्ते हस्ते रोना, खोना, मिलना, और फिर गुमशुदा हो जाना,डूबना, उभारना और फिर डूब जाना, रूठे... [पूरी पोस्ट]
writer पियूष अग्रवाल

कविता

views
9
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
5
[21 Apr 2010 12:46 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix