कैसे मन मुस्काए
रोटी समझ चाँद को बच्चा मन ही मन ललचाएआशा भरकर वो यह देखेमाँ कब रोटी लाएदशा देखकर उस बच्चे कीकैसे मन मुस्काए | घर के बाहरचलना दूभरसाँस सभी कीनीचे ऊपरकाँप रहाउसका दिल थर-थरमन बेहद घबरायेऐसे आतंकी साये मेंकैसे मन मुस्काए | हुआ धमाकाबम का...
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sangeeta swarup
कविता ( सर्वाधिकार सुरक्षित )
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[21 Apr 2010 10:50 AM]



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