भाग किसी का भी हो, छींका टूटना चाहिए

Alag sa रेल में यात्रा करते समय यह कोशिश रहती है कि क्लास कोई भी हो, मौसम कैसा भी हो, यात्रा छोटी हो या बड़ी यदि अकेला हूं तो ऊपर की बर्थ होनी चाहिये। ऊपर वाले की कृपा से तीन-चौथाई यात्राएं ऊपर ही ऊपर की हैं। पर जब से सरकार मेहरबान हो गयी है तब से ऊपर की बर्थ... [पूरी पोस्ट]
writer Gagan Sharma, Kuchh Alag sa
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[21 Apr 2010 09:25 AM]

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