उफ ये तेरी हठधर्मिता
आजकल विनोद जी को पढ़ रहा हूं । खिलेगा तो देखेंगे । मौजूदा दौर में अपनी भाषा की ताकत का एक उदाहरण राग दरबारी है।अरूण कमल जी की पंक्तियां याद आ रही है कि भाषा की सभी हड्डियां चटका के शुक्ल जी ने रागदरबारी की भाषा का ईजाद किया है । यकीनन रागदरबारी अपनी...
[पूरी पोस्ट]
प्रभात रंजन
10
0
0
0
2
[21 Apr 2010 09:07 AM]



Shuffle








