और क्या बताएं
और क्या बताएं, ज़माना ख़राब है .पीते हैं जैसे पानी, होती शराब है.देखी थी इश्के उल्फत, नफ़रत में जी रहे हैं.वो भी ख़राब थी, ये भी ख़राब है....
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AMAR NATH GIRI 'AKASH'
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[21 Apr 2010 07:49 AM]



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