उन बीते हुए दिनों में

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति - तुम मुझे बिल्कुल भी अच्छे नहीं लगते ।-बिल्कुल भी नहीं ?-ह्म्म्मम्म .....बिल्कुल भी नहीं ।-इत्ता सा भी नहीं ?-अरे कहा ना बिल्कुल भी नहीं फिर इत्ता सा कैसे कर सकती हूँ ।-"मैं सोच रहा था कि इत्ता सा तो करती होगी ।" कहते हुए मैं मुस्कुरा जाता हूँ ।वो उठकर... [पूरी पोस्ट]
writer अनिल कान्त :

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[21 Apr 2010 07:00 AM]

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