एक कविता सा कुछ

कही  अनकही कविता लिखना इतना अनायास होता है कि खुद मैं बहुत बार हैरानी करता हूं और फिर यह यकीन भी पुख्ता हो जाता है कि कविता दरअसल इलहाम होती है ऐसी ही एक ताजा इलहामी कविता पेशे नजर है-बुझे से दिन और उदास शामेंबिखरे सपने हैं उजाड से आशियाने में जैसे टूटी हांडी में... [पूरी पोस्ट]
writer DUSHYANT
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[21 Apr 2010 06:45 AM]

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