किराये की जिंदगी
कभी किसी कभी किसी की,हमेशा दूसरों की तर्ज पे जी,पता नहीं अपनी कब होगी,मेरी ये किराये की जिंदगी.कभी रिश्तों कभी दोस्तों की,ख्वाहिशें दूजों के मन की ही,मेरी अधूरी इच्छाओं से भरी,मेरी ये किराये की जिंदगी.मंजिलें तो तय थी खुद की,पर रास्ते दुनिया...
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हिमांशु पन्त
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[21 Apr 2010 03:18 AM]



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