एक बार फिर पितृ विहीन हो गया मैं

एकोऽहम् मैं एक बार फिर पितृ-विहीन हो गया, इसी नौ अप्रेल को। मेरे पूज्य पिताजी श्रीयुत पण्डित द्वारकादासजी बैरागी के देहावसान के कोई साढ़े सोलह बरस बाद।लेकिन आगे कुछ भी कहने से पहले स्पष्ट कर दूँ कि यह पोस्ट मैं पूरी तरह से केवल खुद के लिए लिख रहा हूँ। इसकी... [पूरी पोस्ट]
writer विष्णु बैरागी

मेरे आसपास के औलिया

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[21 Apr 2010 02:53 AM]

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