बादल

दर्पण बादल एक निगाह झरोखे को चीरतीनिहारती बड़े  अदब सेदिल ही दिल में पुकारतीतिश्नगी  लबों पे लियेहलक सहलाते-सहलातेफलक़ की तरफ देखा उसनेआफताब अपनी पूरी ताक़त  के साथ तमाज़त बरसा रहा थाज़मीं तो तवे जैसी तप रही थी पांव रखते ही... [पूरी पोस्ट]
writer SURINDER RATTI

नज़्म

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[21 Apr 2010 01:26 AM]

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