पाती मेरे नाम की !

बैसवारी baiswari अचानक बहुत दिनों बाद एक चिट्ठी के रूप में पोस्ट-कार्ड को पाकर जो आनंद मिला,वह कम-से-कम 'इंटरनेटी 'दुनिया की समझ के बाहर है। हमारे एक साथी हैं,जिनसे अब मुलाक़ात भी यदा-कदा होती है,बातचीत मोबाईलवा पे होती रहती है। यह चिट्ठी जो आई , उनके पिताजी की तरफ से आई... [पूरी पोस्ट]
writer संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI

चिट्ठी

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[21 Apr 2010 01:07 AM]

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