ब्लॉग जगत और व्यवस्था पर व्यंग करती कविताओं कि सार्थकता -----?
आज बहुत दिनों बाद आलेख के वजाय कविता का सहारा लेने का सोचा है, इस देश कि सड़ चुकी व्यवस्था का चित्रन करने तथा यह जानने के लिए कि ब्लोगरों कि क्या प्रतिक्रिया आती है,मेरे इस प्रयास पर ?आज मैंने विषय चुना है इस देश कि शिक्षा नीती ,प्रस्तुत है आपकी सेवा में...
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[20 Apr 2010 23:11 PM]



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