पूरब-पश्चिम रोड़
पूरब-पश्चिम रोड़ पूरब-पश्चिम रोड़ हो , हो मर्दों की बात ।
प्राणेश्वरियाँ प्राण दे, रखे आपकी बात ।।
रखे आपकी बात, बढ़े बुजुर्गों का मान ।
खा मालपुआ खीर , वे दिन-भर चबाय पान ।।
कह ’वाणी’ कविराज, जरा करले जोड़-तोड़ ।
नाज करता समाज , रख पूरब-पश्चिम रोड़ ।।...
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[20 Apr 2010 22:41 PM]



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