कहते हो के हम कोई नया ख़्वाब न देखें

युग-विमर्श  (YUG -VIMARSH)   یگ ومرش कहते हो के हम कोई नया ख़्वाब न देखें।क्या ख़ुद को तसव्वुर में भी शादाब न देखें॥क्यों अपने शबो-रोज़ से हम मूंद लें आँखें,कैसे तेरी जानिब दिले-बेताब न देखें॥साहिल पे चेहल-क़दमियाँ करते रहें दिन-रात,बस कैफ़ियते-माहिए-बेआब न देखें॥आँगन में उतर आये अगर रात... [पूरी पोस्ट]
writer युग-विमर्श
views
8
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
2
[20 Apr 2010 22:03 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix