मैं दिये बुझते जला दूँ !
स्नेह का तुम दान दे दो मैं दिये बुझते जला दूँ ! चुक गया है तेल जीवन का न जिनमें ज्योति कण भर,जा रहे हैं रूठ कर जो विवश बंधन में जकड कर,जो तनिक तुम मान दे दो मैं ह्रदय रूठे मना लूँ ! स्नेह का तुम दान दे दो मैं दिये बुझते जला दूँ १ स्वप्न सूने जा रहे हैं...
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Sadhana Vaid
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[20 Apr 2010 22:12 PM]



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