“बाल कविता:समीर लाल (उड़नतश्तरी)”
“गर्मी की छुट्टी” -समीर लाल ’समीर’गर्मी की छुट्टी कर ली हमने खूब पढ़ाई पढ़कर के आँखें खुजलाई लिखी परीक्षा मेहनत कर के तब गर्मी की छुट्टी आई. अब होगा बस खेल तमाशा सुबह शाम को धूम धमाका सब बच्चे घर में खेलेंगे धूप भला हम क्यूँ झेलेंगे.. पापा संग जा कुल्फी...
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डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
बालकविता
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[20 Apr 2010 20:56 PM]



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