ले आया हूँ डोली अब मैं तेरे ससुराल में .....
काश की,ले आया हूँ डोली अब मैं तेरे ससुराल में;नए रिश्तों की बोली भारी प्यार में ......नजरें होतीं नहीं हैं सबकी तुझसे अलग; अब तू ही कहे क्यों हैं ऐसे ये सब ...........देहलीज ससुराल की और पहला कदम; करे के पुरे यहाँ तू, तेरे सारे रसम ......कलश गिरा कर, तू...
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Vishal Kashyap
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[20 Apr 2010 18:21 PM]



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