स्वार्थों में जीवन
पिछले दो माह से मन बहुत ही अस्थिर है. कुछ विषेश कारण तो नहीं है, शायद समझने में कुछ कमी है.लगता है सम्बंध स्वार्थों से जुड़ गये हैं. इसलिऐ इनकी गहनता और पवित्रता नहीं रही. सम्बंध केवल सुविधा और स्वार्थ से बनते बिगड़ते हैं इसलिऐ जीवन अशांत रहता है....
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Sunil Deepak
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[01 Apr 2010 14:17 PM]



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