बेटी की विदाई
कवितायेँ जीने के लिए जरूरी हैं, दूसरों की नहीं कहता; पर अपने लिए तो यह बहुत बड़ी जरूरत है. राजेश जोशी की पहले पढ़ी एक कविता आज फिर पढ़ी, नया कुछ लगा ऐसा नहीं कहूँगा. हाँ! पुराना जरूर सिहर गया.
राजेश जोशी की कविताओं में स्वाद होता है, कई किस्म के स्वाद....
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आशुतोष पार्थेश्वर
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[20 Apr 2010 14:10 PM]



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