फ़ितरत इन्सान की -------इन्सान खुद बनाता है ...................
इस पोस्ट को पढने से पहले पढें-------------इसे... ( क्योंकि इसके बाद ही मै ये सोच पाई हूँ )---हर कोई बस अपनी ही किस्मत बदलना चाहता है ,सिर्फ़ अपना घर ही बसाता है भले दूसरों का उजड जाए , छोटी-सी चादर भी अगर सबसे बाँट ले कोई , तो क्या मजाल किसी की कि कोई भूख...
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Archana
कविता
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[20 Apr 2010 13:22 PM]



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