महामूर्खराज खुश हुआ... यययायाया........ हू
तुम लौट आयी, दूर हुआ हलाहल अंधेरा, रोशनी की चकाचौंध देख, भाई ये दिल मेरा, गार्डेन गार्डेन हुआ, विरह पीड़ा तो, थी दिल मे, पर तेरी भी, अपनी मजबूरी थी, प्रकृति के तूफ़ान ने, रोके थे तेरे कदम, पर आठवें दिन तेरा, आ जाना भी, किसी अष्टम अचरज, से ना है...
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महामूर्खराज
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[20 Apr 2010 12:29 PM]



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