भूल्या बिसरया भाईडां ने

Shri Tan Singh, Badmer भूल्या बिसरया भाईडां ने आज लवना लागी रे जागी रे जागी जागी दिवळे री जोत जागी रे बरसां सूं पतंगो आयो पांवणो समदर रै किनारे मेळो चालै नी पतंगा रे सुणीजै भागीरथ आया घरां आई गंगा रे बांटां रे घट-घट मे चानणोआज म्हारै मनडे रो सौवणो मोर नाच्यो रे परभातां री... [पूरी पोस्ट]
writer क्षत्रिय

स्व.श्री तन सिंह जी कलम से

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[20 Apr 2010 11:55 AM]

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