प्रेम का संगीत..

हिंदी हैं हम.. "आमी अरिंदम",अचानक कुछ याद आया,"मैं अरिंदम भट्टाचार्य,किरायेदार !!!"कौन वाला किरायेदार बाबु,इन्हा त तीन ठों हैं |"दरवाज़ा खुल गया और सामने खड़ा मकान मालिक का नया नौकर बतीसी दिखाने लगा|मुझे बहुत जोर का गुस्सा आया,जी किया मुंह ही तोड़ दूँ|लेकिन इस महंगाई... [पूरी पोस्ट]
writer आस्था "देव"
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[20 Apr 2010 10:47 AM]

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