दिखावा न हो दरम्यां
मैंने बचपन में एक कविता पढ़ी थी चिड़िया वाली ...एकदम सही से तो नही याद लेकिन उसका मतलब कुछ इस तरह था कि चिड़िया का बच्चा जब घोंसले से बाहर निकाल कर देखता है तो उसका ये भ्रम टूट जाता है कि सारी दुनिया महज उसका ये घोंसला ही है ...कुछ इस तरह थी लाइन कि ....अब...
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himani
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[20 Apr 2010 09:31 AM]



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