मैं कुछ लिखना चाह रही हूं पर क्या

मुझे कुछ कहना है बहुत सारे दोस्तों के मेल और फोन है तेरे ब्लाग पर रोज आते हैं और रोज निराश कर देती है। ये वैसा ही है जब आप बहुत न चाहते हुए भी मुस्कुराते हैं। कोई परिचित या ऐसा जिसे आप चाह कर भी उस समय अपने खराब मूड के बावजूद एक स्माइल तो दे ही देते हैं। लेकिन आपकी... [पूरी पोस्ट]
writer neelima sukhija arora

उदासी

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[20 Apr 2010 08:47 AM]

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