रातभर दर्द के जंगल में घुमाती है मुझे...

Firdaus's Diary रातभर दर्द के जंगल में घुमाती है मुझेयाद उस शख्स की हर रोज़ रुलाती है मुझेख़्वाब जब सच के समन्दर में बिखर जाते हैंउम्र तपते हुए सहरा में सजाती है मुझेज़िन्दगी एक जज़ीरा है तमन्नाओं काधूप उल्फत की यही बात बताती है मुझेहर तरफ़ मेरे मसाइल के शरार बरपा... [पूरी पोस्ट]
writer फ़िरदौस ख़ान

ग़ज़ल

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[20 Apr 2010 06:23 AM]

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