तेरा जाना दिल के अरमानो का लूट जाना

हलफ़नामा भैया जी की नियत खराब नहीं थी । बस बात इतनी है कि निशाने पर आ गए । राजनीति के शिवपालगंज में थरूर भैया की एंट्री रंगनाथ की तरह हुई । तौर तरीकों में विदेशी थरूर भैया देसी माहौल में खप पाते , इससे पहले ही खपा दिए गए । क्या करें, इतने कम दिनों में गंजहापन... [पूरी पोस्ट]
writer प्रभात रंजन
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[20 Apr 2010 06:22 AM]

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