shabdon ke akshat
कहानीएक ताजा खबरडॉ.स्वाति तिवारी''हम बाजार में खड़े हैं, बाजार के लिए ही काम करते हैं, हमारे घर का चूल्हा हमारी स्टोरी के बिकने पर जलता है। क्या करें... भाभी जिस समाज का समूचा ढांचा ही दोहरे मानदण्डों पर टिका है वहां अपने आदर्श नहीं चलते..... आदेश रखने...
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swati
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[20 Apr 2010 02:06 AM]



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