हमारा शौक और बेचारे जानवर की मृत्यु
जब-जब भी आइने में खुद को देख लेती हूँ तो रातों की नींद उड़ जाती है। दूसरे दिन से ही मोर्निंग वाक शुरू हो जाता है। लेकिन फिर एकाध प्रवास और घूमना निरस्त। कम्प्यूटर छूटता नहीं और फेट बढ़ने का क्रम टूटता नहीं। लेकिन फिर भी अभी कुछ दिनों से क्रम चल ही रहा...
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ajit gupta
जीव-जन्तु और हम
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[20 Apr 2010 01:45 AM]



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