पूँजीवाद-माओवाद: कुछ नोट्स-५

निर्मल-आनन्द माओवादियों के पक्ष की एक बात यह है कि जिनकी लड़ाई लड़ रहे हैं, जिनके हितों की रक्षा की बात करते हैं उस जनता के साथ बिलकुल घुले-मिले हुए हैं। जनता और उनके प्रतिनिधियों में कोई बाधा नहीं है। दूसरी तरफ़ पूँजीवाद तंत्र के राज्य और जनता के बीच इतने-इतने संस्थान... [पूरी पोस्ट]
writer अभय तिवारी

राजनीति

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[20 Apr 2010 00:04 AM]

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