विदुर नीति-मित्र का पहले से परिचित या संबंधी होना जरूरी नहीं (hindu dharma sandesh-religion of friendship)
सत्कृतताश्च श्रुतार्थाश्च मित्राणं न भविन्त ये।तान् मुतानपि क्रव्यादाः कृतध्नान्नोपर्भुजते।।हिन्दी में भावार्थ-जो अपने मित्र से सम्मान और सहायता पाने के बाद भी उनके नहीे होते ऐसे कृतघ्न मनुष्य के मरने पर उनका मांस तो मांस खाने वाले जंतु भी नहीं खाते। न...
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दीपक भारतदीप
हिन्दू-धर्म
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[19 Apr 2010 23:02 PM]



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