मो देखत मो दास दुखित भयौ, यह कलंक हौं कहाँ गवैहों ?
इस बार फिर ब्रजभूमि जाना हुआ। वही ब्रजभूमि जिसकी धूल का स्पर्श करने के लिये सहस्रों वर्षों से भारत के कौने-कौने से श्रध्दालु आते हैं। वही ब्रजभूमि जिसके स्मरण मात्र से विष्णु भक्तों का रोम-रोम पुलकित हो जाता है। वही ब्रजभूमि जिसकी पावन धरा का स्पर्श करने...
[पूरी पोस्ट]
Dr. Mohanlal Gupta
samaj
13
0
0
0
0
[19 Apr 2010 22:24 PM]



Shuffle








