विदा तुझको मैं घर से करा जाऊंगा.....
काश की,विदा तुझको मैं घर से करा जाऊंगा; जान-बुझकर इस खाता को दोहराऊंगा...बाबुल तेरे, हैं बिलखते तुझे चूम कर; तेरे बचपन के खिलौनों को सोच-सोच कर ... अम्मा, आयीं हैं रोती हुई अब इधर; सारी मर्यादा और ममता को साथ लेकर ... भैया कहते हैं बेहना, संभालना...
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Vishal Kashyap
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[19 Apr 2010 21:37 PM]



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