दबी थीं राख में चिंगारियाँ ख़बर थी किसे

युग-विमर्श  (YUG -VIMARSH)   یگ ومرش दबी थीं राख में चिंगारियाँ ख़बर थी किसे।जला्येगी ये ज़मीं आस्माँ ख़बर थी किसे॥सुख़नवरों में थे गोशानशीन हम भी कहीं,हमारे दम से थी महफ़िल में जाँ ख़बर थी किसे॥ख़मीरे इश्क़ भी क़ल्बे-बशर की साख़्त में है, ये रंग लायेगा होकर जवाँ ख़बर थी किसे॥हयात में था... [पूरी पोस्ट]
writer युग-विमर्श
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[19 Apr 2010 20:09 PM]

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