नसीब
चाँद जब रात को कतरा कतरा बिखरता है ।एक टीस इस दिल मे यूँ ही उमरता है ॥शायद टूटता है, ख्वाब किसी का सहर से पहलेकोई देवदास अपने पारो से, यूँ ही बिछरता है ॥जब सूरज की किरण, चाँदनी से टकराता है ।एक ज्वाला, दो दिलो के बीच भड़काता है ॥और शायद कहीँ किसी पीपल के...
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dipayan
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[19 Apr 2010 15:09 PM]



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