और क्या देंगे सभी को हौसला देते रहें ...

Nayachintan पांच-छः दिन बाद प्रवास से लौट कर फिर शुभचिंतको के सामने हूँ. होशंगाबाद गया था. वहां पंडित माखनलाल चतुर्वेदी की पत्रकारिता पर बोलना था. खैर, जो सूझा, वो बोल दिया. यह कोई बड़ी बात नहीं, जो मै बताऊँ. बड़ी उपलब्धि तो यह रही कि माँ नर्मदा की गोद में अठखेलियाँ... [पूरी पोस्ट]
writer girish pankaj

सवक्तव्य-ग़ज़ल

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[19 Apr 2010 14:23 PM]

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