तुम्हारे पाँव

कर्मनाशा इधर कुछ समय से कई तरह की व्यस्तताओं और यात्राओं के चलते लिखना - पढ़ना लगभग छूटा - सा हुआ है। देह थक जाती है तो दिमाग भी विश्रांति की दरकार करने लगता है और लगता है 'दिल ढूँढता है फिर वही फुरसत के रात दिन' जैसे वाक्यांश कहीं खो से गए हैं लेकिन नींद का उत्सव... [पूरी पोस्ट]
writer sidheshwer
views
22
upvote
3
downvote
0
rating
3
comments
5
[19 Apr 2010 14:37 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix