तुम्हारे पाँव
इधर कुछ समय से कई तरह की व्यस्तताओं और यात्राओं के चलते लिखना - पढ़ना लगभग छूटा - सा हुआ है। देह थक जाती है तो दिमाग भी विश्रांति की दरकार करने लगता है और लगता है 'दिल ढूँढता है फिर वही फुरसत के रात दिन' जैसे वाक्यांश कहीं खो से गए हैं लेकिन नींद का उत्सव...
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sidheshwer
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[19 Apr 2010 14:37 PM]



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