भविष्य : एक प्रश्न

Kuchh kahi kuchh unkahi सारा माहौल ही बदरंग हो गया है,चोर और सिपाही का संग हो गया है।राज करना चाहते हो तो आओ सुनो ,भीख में वोट मांगना ढंग हो गया है।एक कुर्सी के कई दावेदार हैं यहाँ पर,बेटे और बाप में ही जंग हो गया है।क़त्ल करना अब कोई अपराध है नहीं,क़त्ल तो राजनीति का अंग हो गया... [पूरी पोस्ट]
writer VIJUY RONJAN
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[19 Apr 2010 12:36 PM]

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