अपने को बदलो कलमकारों
जाने कब हम कलमकारों का जमीर जागेगा औेर सच्चाई की जंग के लिए आगे आएंगे ? आजादी के बाद जो अपेक्षाएं थीं। समतायुक्त समाज का सपना था। हर हाथ को काम और रोटी का वादा था। क्या हुआ इन वायदों और संकल्पों का ? आज भी अंधेरे में भारत सिसक रहा है। किलकारियां मार रहा...
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Dr M.S. Parihar
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[19 Apr 2010 11:25 AM]



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