खामोशी-शोभना 'शुभि'
ख़ामोशी बोलती है....खामोशी गूंगी नहीं होतीकितनी भी खामोश दिख लेकितनी भी ओढ़ ले गंभीरता की बरसाती लेकिन उस बरसाती के नीचेइकट्ठे होते रहते हैं कई कोलाहलउबलते और बुझते रहते हैं कई हलाहल कई गहनतम आवेश कितनी बार तो कोशिश होती है इसे सच में...
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Shobhna Choudhary
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[19 Apr 2010 09:54 AM]



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